100+ Nafrat Shayari in Hindi

100+ Nafrat Shayari is a compelling collection of poetic expressions brimming with intense emotions of disdain and aversion. Delving into the depths of human emotions, these verses encapsulate the bitterness of resentment, the anguish of betrayal, and the darkness of hatred. Each shayari delves into the complexities of relationships gone awry, the pain of broken trust, and the scars left by unrequited love. Through evocative metaphors and vivid imagery, the shayari highlights the complexities of human nature, where love can turn to loathing and fondness can transform into animosity. The verses serve as a poignant reminder of the frailty of emotions and the power they wield in shaping our connections with others. In this compilation, the art of words paints a haunting tapestry of emotions, resonating with readers and inviting them to explore the myriad shades of human sentiment. Whether seeking solace or contemplating the intricacies of human bonds, 100+ Nafrat Shayari offers a captivating journey through the dark alleys of the heart, reminding us of the universality of these emotions in the tapestry of human experience.

Nafrat Shayari

तेरी नफरत से भी हमने प्यार किया था

मगर तुमने हमे दर्द और जख्म दिया था.

कोई तो हाल-ए-दिल अपना भी समझेगा,

हर शख्स को नफरत हो जरूरी तो नहीं.

दिलों में अगर पली बेजान कोई हसरत न होती,

हम इंसानों को इंसानों से यूँ नफरत न होती.

तेरी बेवफाई में ना नफरत हुई,

और ना ही इश्क खत्म हुआ.

मैं काबिले नफरत हूँ तो छोड़ दे मुझको,

तू मुझसे यूँ दिखावे की मोहब्बत न किया कर.

ना मेरा प्यार कम हुआ न उनकी नफरत,

अपना अपना फर्ज था दोनों अदा कर गये.

उसने मुझ से नफरत मरते दम तक,

करने की कसम खा ली है,

और मैंने भी उसे प्यार मरते दम तक,

करने की कसम खा ली है.

नफरत की आग जो तुमने,

इस दिल में लगाई है,

तुमसे ही नही मोहब्बत,

से भी हमें शिकायत हुई है.

जरूरत है मुझे नये नफरत करने वालों की,

पुराने तो अब मुझे चाहने लगे है.

हमें बरबाद करना है तो हमसे प्यार करो,

नफरत करोगे तो खुद बरबाद हो जाओगे.

मोहब्बत सच्ची हो तो कभी नफरत नहीं होती है,

अगर नफरत होती है तो मोहब्बत सच्ची नहीं होती है.

वो नफरतें पाले रहे हम प्यार निभाते रहे,

लो ये जिंदगी भी कट गयी खाली हाथ सी.

दिल पर न मेरे यू वार कीजिए,

छोड़ो ये नफरत थोड़ा प्यार कीजिए,

तड़पते हैं जिस कदर तेरे प्यार में हम,

कभी खुद को भी उस कदर बेकरार कीजिए.

कत्ल तो लाजिम है इस बेवफा शहर में,

जिसे देखो दिल में नफरत लिये फिरता है.

तेरी नफरत को मैने प्यार समझ कर अपनाया है,

प्यार से ही नफरत खत्म होती है,

तूने ही तो समझाया है.

नफरत की आग जो तुमने,

इस दिल में लगाई है,

तुमसे ही नही मोहब्बत,

से भी हमें शिकायत हुई है.

नफरत मत करना मुझसे बुरा लगेगा,

बस एक बार प्यार से कह देना,

अब तेरी जरूरत नहीं.

मुझसे नफरत करने वाले भी,

कमाल का हुनर रखते हैं,

मुझे देखना तक नहीं चाहते,

लेकिन नजर मुझपर ही रखते हैं.

खुदा सलामत रखना उन्हें,

जो हमसे नफरत करते हैं,

प्यार न सही नफरत ही सही कुछ तो है,

जो वो सिर्फ हमसे करते हैं.

वो वक्त गुजर गया जब मुझे तेरी आरजू थी,

अब तू खुदा भी बन जाए,

तो मैं सजदा न करूँ.

हाँ मुझे रस्म ए मोहब्बत का सलीका ही नहीं,

जा किसी और का होने की इजाजत है तुझे.

मैं काबिले नफरत हूँ तो छोड़ दे मुझे,

तू मुझसे यूँ दिखावे की मोहब्बत ना किया कर.

लेकर के मेरा नाम वो मुझे कोसता है,

नफरत ही सही पर वो मुझे सोचता तो है.

नफरतों का सिलसिला जारी है,

लगता है दूर जाने की त्यारी है,

दिल तो पहले दे चुके हैं हम,

लगता है अब जान देने की बारी है.

इतनी नफरत है उसे मेरी मोहब्बत से,

उसने अपने हाथ जला लिए,

मेरी तकदीर मिटाने के लिए.

वह कमबख्त मेरे प्यार

को तो क्या मेरी नफरत के

भी काबिल नही था,

तेरी नफरत में वो दम कहाँ,

जो मेरी चाहत को कम करे.

मिलना बिछड़ना सब किस्मत का खेल है,

कभी नफरत तो कभी दिलों का मेल है,

बिक जाता है हर रिश्ता दुनियां में,

सिर्फ दोस्ती का यहा नाँट पर सेल है.

जो हमारी नफरत के भी लायक नहीं थे,

हम उन्ही से बेशुमार प्यार कर बैठे.

मोहब्बत करो तो हद से ज्यादा,

और नफरत करो तो उससे भी ज्यादा.

नफरत के बाजार में जिने का अलग ही मजा हैं,

लोग रुलाना नहीं छोड़ते और हम हँसना नहीं छोड़ते.

कभी उसने भी हमे चाहत का पैगाम लिखा था,

सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,

सुना है आज उसे हमारे जिक्र से भी नफरत है,

जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था.

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