100+ Majboori  Shayari in Hindi

Explore a soul-stirring collection of 100+ Majboori  Shayari that delve deep into the complexities of life’s constraints and limitations. These poignant verses beautifully express the emotions of helplessness, longing, and the struggles faced in challenging circumstances. Each Shayari reflects the human spirit’s resilience and the desire for liberation from the chains of destiny. With profound metaphors and heartfelt expressions, these poems resonate with those who have experienced the pangs of compulsion and the yearning for freedom. Through the artistry of words, Majboori  Shayari captures the essence of the human experience, inspiring empathy and understanding. Immerse yourself in this touching anthology that unites hearts in the shared journey of life’s trials and tribulations.

Majboori  Shayari

किसी की मजबूरी का मजाक ना बनाओ दोस्तों !

जिन्दगी कभी मौका देती है ।

तो कभी धोखा भी देती है !

किसी की मजबूरी कोई समझता नहीं !

दिल टूटे तो दर्द होता है, मगर कोई कहता नहीं !

“मजबूरी में जब कोई जुदा होता है,

जरूरी नहीं की वो बेवफा होता है,

दे कर वो आपकी आँखों में आँसू,

अकेले में आपसे भी ज्यादा रोता है !

ऐसा नही है की वक्त ने मौका नहीं दिया,

हम आगे बढ़ सकते थे,

पर तूने मजबूर किया !

क्या गिला करें तेरी मजबूरियों का हम,

तू भी इंसान है कोई खुदा नहीं,

मेरा वक़्त जो होता मेरे मुनासिब,

मजबूरिओं को बेच कर तेरा,

दिल खरीद लेता ।

“होगी कोई मजबूरी उसकी भी,

जो बिन बताएं चला गया,

वापस भी आया तो किसी

और का होकर आया !

उसे चाहना हमारी कमजोरी है !

वो क्यू न समझते हैं हमारी खामोशी को ।

उन से कह न पाना हमारी मजबूरी है !

थके लोगों को मजबूरी में चलते देख लेता हूँ!

मैं बस की खिड़कियों से ये तमाशे देख लेता हूँ😒

“आप दिल से यूँ पुकारा ना करो !

हमको यूँ प्यार से इशारा ना करो,

हम दूर हैं आपसे ये मजबूरी है हमारी,

आप तन्हाइयों मे यूँ रुलाया ना करो !

हरा सकती है ! डरा सकती है!

वो मजबूरी है साहब !

वो इंसान से कुछ भी करा सकती है।

बोझ उठाना शौक कहाँ है मजबूरी का सौदा है ,

रहते रहते स्टेशन पर लोग कुली हो जाते हैं ।

पढ़ने की उम्र में उसने बच्चे से मजदूरी कराई थी,

वह मजदूरी नही साहब मजबूरी थी।

आपने मजबूर कर दिया,

जाने क्यों खुद से दूर कर दिया,

अब भी यही सवाल है दिल में,

हमने क्या ऐसा कसूर कर दिया ।

ऐसी भी क्या मजबूरी आ गई थी जनाब ।

की आपने हमारी चाहत का कर्ज धोका दे कर चुकाया !

“किसी की अच्छाई का इतना भी फायदा मत उठाओ !

कि वो बुरा बनने के लिए मजबूर हो जाये ।

” बहाना कोई तो दे ऐ जिंदगी !

की जीने के लिए मजबूर हो जाऊँ ।

वो हमेशा बात बनाती क्यों थी,

मेरी झुठी कसम खाती क्यों थी,

मजबूरियों का बहाना बना कर

मुझ से दामन छुड़ाती क्यों थी !

कई लोग तो बस दिखाते हैं अमीरी,

समझते नहीं हैं दूसरों की मजबूरी ।

मजबूर इस दिल की धड़कन

तुम सुनने की कोशिश तो करते,

जा रहा हूं दूर तुम्हारी जिंदगी से

मुझे रोकने का दिखावा तो करते।

“मैं बोलता हूँ तो इल्जाम है बगावत का,

मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है ।

कितने मजबूर हैं हम प्यार के हाथों,

ना तुझे पाने की औकात,

ना तुझे खोने का हौसला !

नहीं कर सकता तुम्हारी सारी इच्छाएं पूरी,

जरा समझा करो तुम मेरी मजबुरी !

अपने टूटे हुए सपनों को बहुत जोड़ा,

वक्त और हालत ने मुझे बहुत तोड़ा,

बेरोजगारी इतने दिन तक साथ रही की,

मजबूरी में हमने शहर छोड़ा !

हमने खुदा से बोला वो छोड़ के चले गये !

न जाने उनकी क्या मजबूरी थी !

खुदा ने कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं !

ये कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी ।

मजबूरी हैं सांसों की जो चल रही है,

वरना जिंदगी तो कब की थम गई हैं !

“मजबूरियॉ ओढ़ के निकलता हूँ घर से आज कल,

वरना शौक तो आज भी है बारिशों में भीगनें का।

क्या गिला करें तेरी मजबूरियों का हम,

तू भी इंसान है कोई खुदा तो नहीं,

मेरा वक्त जो होता मेरे मुनासिब,

मजबूरियों को बेच कर तेरा दिल खरीद लेता !

किसी गिरे इन्सान को उठाने आये या ना आये,

ये जमाने वाले मजबुरी में पड़े इंसान का फायदा,

उठाने जरुर आयेंगे !

जीने की चाह थी पर मजबूर थे कितने,

तलाश थी हमें तुम्हारी पर तुम दूर थे कितने ।

किसी की अच्छाई का इतना फायदा न उठायें,

कि वो बुरा बनने के लिए मजबूर हो जाए ।

तुम बेवफा नहीं ये तो धड़कने भी कहती हैं,

अपनी मजबूरी का एक पैगाम तो भेज देते !

मोहब्बत किस को कहते हैं,

मोहब्बत कैसी होती हैं,

तेरा मजबूर कर देना,

मेरा मजबूर हो जाना ।

तुम बेवफा नहीं थे ये मैं भी जान गया होता

कभी तुमने अपनी मजबूरी बताई तो होती ।

ये न समझ के मैं भूल गया हूँ तुझे,

तेरी खुशबू मेरी सांसो में आज भी है,

मजबूरी ने निभाने न दी मोहब्बत,

सच्चाई तो मेरी वफा में आज भी है !

गरीब अक्सर तबियत का बहाना बनाकर,

मजबूरियाँ छुपा जाते हैं !

इस सारे जहाँन में एक लड़की पसंद आयी,

और वो भी न मिली तो तकलीफ तो होगी न !

दोनों का मिलना मुश्किल है,

दोनों हैं मजबूर बहुत,

उस के पाँव में मेहंदी लगी है,

और मेरे पाँव में छाले हैं ।

हर मरीज का इलाज मिलता था उस बाजार में,

मोहब्बत का नाम लिया दवाखाने बन्द हो गये !

कभी गम तो कभी खुशी देखी,

हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी,

उनकी नाराजगी को हम क्या समझें,

हमने तो खुद अपनी तकदीर की बेबसी देखी !

क्यूँ करते हो वफा का सौदा,

अपनी मजबूरिओं के नाम पर,

मैं तो अब भी वो ही हूँ,

जो तेरे लिए जमाने से लड़ा था ।

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